चल आज कुछ नया करते हैं,
आज दूसरों को छोड़ खुद से प्यार करते हैं।
आज आइने में खुद से बात करते हैं,
खुद की तारीफों में चार शब्द बुनते हैं।
चल भूल आज दुनिया को,
अपने आप से मिलते हैं।
छोड़ दुनिया की झूठी सरगम,
अपनी धुन में खोते हैं।
चल ना आज अपनी अंतरात्मा से
कुछ गुफ्तगू करते हैं।
मन की आवाज़ को,
थोड़ी मनमानी करने देते हैं।
चल आज खुद मे खुशी की एक झलक ढूंढ़ते हैं।
चल आज अपने आप की खातिर जीते हैं।
चल आज खुद से प्यार करते हैं।